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मैटेरियल साइंस और कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग में उत्कृष्ट शोध के लिए होगा सम्मान, 28 सितंबर को डार्मस्टाट में समारोह
रानीखेत। मूल रूप से उत्तराखंड के रानीखेत निवासी और वर्तमान में राजस्थान के पिलानी में रह रहे चिकित्सक डॉ. दिवाकर पाठक के पुत्र डॉ. राघव पाठक ने वैज्ञानिक क्षेत्र में देश और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। उन्हें जर्मनी की शीर्ष वैज्ञानिक संस्था जर्मन सोसायटी फॉर मैटेरियल्स साइंस द्वारा प्रतिष्ठित नाचवुचस्प्रीस युवा वैज्ञानिक पुरस्कार के लिए चुना गया है।

डॉ. राघव पाठक को यह प्रतिष्ठित सम्मान मैटेरियल साइंस और कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार समारोह 28 सितंबर को जर्मनी के डार्मस्टाट में आयोजित किया जाएगा।
डॉ. राघव पाठक वर्तमान में जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ स्टटगार्ट के इंस्टीट्यूट फॉर स्टैटिक्स एंड डायनॉमिक्स ऑफ एयरोस्पेस स्ट्रक्चर्स में शोधकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। उनके नाम अब तक 15 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र और पांच पेटेंट दर्ज हैं। उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें युवा वैज्ञानिकों के बीच यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जा रहा है।
डॉ. राघव पाठक उत्तराखंड के नैथना गांव के सुप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य स्वर्गीय रामदत्त पाठक एवं अध्यापिका स्वर्गीय मुन्नी देवी पाठक के पौत्र तथा ज्योतिषाचार्य संजय पाठक के भतीजे हैं। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
डॉ. राघव पाठक की उपलब्धि पर वरिष्ठ शिक्षक रमेश चंद्र पुजारी, बबिता पुजारी सहित क्षेत्र के तमाम समाजसेवियों और गणमान्य लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

