

हल्दूचौड़। हल्दूचौड़ चौराहे पर रविवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सड़क पार करते समय स्कूटी सवार युवक को तेज गति से आ रहे डंपर ने अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में हिम्मतपुर चौमवाल निवासी कमल पांडे की मौके पर ही मौत होने की सूचना है। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
जानकारी के अनुसार कमल पांडे रविवार दोपहर स्कूटी से हल्दूचौड़ चौराहे पर सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान तेज गति से आ रहे डंपर की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उनकी मौके पर ही मौत होने की सूचना है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर मामले की जानकारी जुटाई।

बताया जा रहा है कि दुर्घटना में शामिल डंपर को पुलिस ने पकड़ लिया है। हालांकि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी विस्तृत और आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। पुलिस की जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
हादसा होते ही जागता है सिस्टम, फिर लौट आते हैं पुराने हालात
हल्दूचौड़ चौराहे पर हुए हादसे ने राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यस्त चौराहे पर वाहनों की तेज रफ्तार के बीच पैदल राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को सड़क पार करने में लगातार जोखिम बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बड़े हादसे के बाद जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि सक्रिय दिखाई देते हैं। चौराहे का निरीक्षण होता है, यातायात व्यवस्था सुधारने की बातें होती हैं और सुरक्षा के लिए कदम उठाने के आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट आती है।
लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद सक्रियता दिखाने के बजाय दुर्घटना संभावित स्थानों पर पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए। चौराहे पर पर्याप्त यातायात संकेतक, स्पष्ट सड़क चिह्न, प्रकाश व्यवस्था, वाहनों की गति पर नियंत्रण और सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की व्यवस्था जरूरी है।
कमल की मौत से क्षेत्र में शोक
कमल पांडे की हादसे में मौत की सूचना से हिम्मतपुर चौमवाल और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए संबंधित विभागों से महज निरीक्षण और आश्वासन के बजाय स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क हादसे के बाद मुआयना और आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। दुर्घटना संभावित चौराहों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा होनी चाहिए और सामने आने वाली कमियों को तत्काल दूर किया जाना चाहिए, ताकि लापरवाही और बदहाल यातायात व्यवस्था की कीमत किसी दूसरे परिवार को अपनी जान गंवाकर न चुकानी पड़े।

