
चंपावत। मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयास से छोटे स्तर पर शुरू किया गया काम भी सफलता की बड़ी कहानी बन सकता है। ग्राम अमोड़ी निवासी पशुपालक बालकृष्ण भट्ट ने महज 35 हजार रुपये की पूंजी से एक गाय खरीदकर गौपालन शुरू किया। आज उनका यह छोटा प्रयास ‘नितिन डेयरी एंड फार्मिंग’ के रूप में विकसित हो चुका है।

बालकृष्ण ने डेयरी व्यवसाय की शुरुआत एक गाय से की थी। निरंतर मेहनत, पशुपालन के प्रति समर्पण और राज्य सरकार से मिली सहायता का उपयोग करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार किया। वर्तमान में उनके पास पांच गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 40 से 45 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
बालकृष्ण उत्पादित दूध को स्थानीय बाजार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बेचते हैं। डेयरी व्यवसाय से उन्हें वर्तमान में करीब 45 से 50 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
बालकृष्ण भट्ट की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों से भी यदि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ काम किया जाए तो स्वरोजगार का मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है। सरकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता और तकनीकी सहयोग ने भी उनके डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से संचालित पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय के अवसर बढ़ाना है। बालकृष्ण जैसे पशुपालकों की सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने के लिए प्रेरित कर रही है।


