दिल्ली जंतर-मंतर में छात्रों-युवाओं के शांतिपूर्ण संसद मार्च के दमन के विरोध में हल्द्वानी में छात्रों-युवाओं, सामाजिक संगठनों का बुद्ध पार्क में प्रदर्शन
दमन करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही करने, पेपर लीक पर रोक लगाने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
हल्द्वानी। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर में छात्रों-युवाओं के शांतिपूर्ण संसद मार्च के दमन के विरोध में हल्द्वानी में छात्रों-युवाओं, सामाजिक संगठनों ने आज 22 जुलाई को बुद्ध पार्क हल्द्वानी में प्रदर्शन किया। इस दौरान दमन करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही करने, पेपर लीक पर रोक पर लगाने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा मोदी सरकार छात्रों-युवाओं का विश्वास खो चुकी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों-युवाओं व नागरिकों का धरना-प्रदर्शन पिछले एक माह से जारी था। लेकिन इस सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। 20 जुलाई के दिन छात्र-नौजवान और सामाजिक संगठनों के लोग शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन और संसद मार्च कर रहे थे। इस दौरान केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस ने बर्बरता पूर्वक छात्र-छात्राओं, युवाओं का दमन किया है। लाठी चार्ज, टियर गैस और पत्थरबाजी की गई है। कई छात्रों के सर फूटे हैं, उनको बिजली के झटके देने की बात, छात्राओं को पुरुष पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया लाठीचार्ज किया, छात्राओं के कपड़े फाड़े गए। सैकड़ो आंदोलनकारी छात्र घायल होकर अस्पताल में भर्ती किए गए। कई छात्र अपने भविष्य को देखते हुए बिना शिकायत किए चुपचाप चले गए। शिकायत भी दर्ज नहीं की। कई लोग हाथों में लाठी लिए, बिना वर्दी के थे। पुलिस वालों की नेमप्लेट नहीं थी। तमाम तरह की प्रताड़ना जलियांवाला बाग हत्याकांड की तरह की गई है।
बार- बार हो रहे पेपर लीक बता रहे हैं कि यह सरकार फेल है। यह अपनी असफलता की जिम्मेदारी लेने को भी तैयार नहीं हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपनी असफलता के लिए इस्तीफा देना ही होगा।
मोदी सरकार हर मोर्चे पर फेल है। समाज का मेहनतकश वर्ग-तबका इस सरकार से परेशान है। छात्र-युवा भी इस ज़ालिम सरकार की मार झेल रहे हैं। इन हालातों को बदलने के लिए हमें एकजुट होना ही होगा। पेपर लीक के चलते छात्र व अभिभावक मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं। कई छात्र इन हालातों में आत्महत्या तक कर ले रहे हैं। सरकार को छात्रों की मांगें सुननी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए।
मोदी सरकार पूरी तरह से तानाशाही पर उतर आयी है। छात्रों-युवाओं सहित समाज के मेहनतकश वर्गों के प्रति यह सरकार हमलावर हैं। उनकी जायज मांगों को भी अनसुना कर रही है। इस गूंगी-बहरी सरकार के खिलाफ हमें एकजुट होना ही होगा। सिर्फ छात्र- युवा ही नहीं, मज़दूर मेहनतकश भी इस सरकार में बदहाल हैं। इन हालातों को बदलने की लड़ाई साझा लड़ाई है। मज़दूर- मेहनतकशों, छात्रों-युवाओं को एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है।
दिल्ली में छात्रों- युवाओं ने सरकार को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। अभी भी समय है कि मोदी सरकार जाग जाए। अगर सरकार छात्रों की जायज मांगों को अनसुना करती रही तो देशभर के युवा अपनी अटूट एकता और संघर्ष से उसे झुकने को मजबूर कर देंगे।
कार्यक्रम में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी से नफीस अहमद खान, सिराज अहमद, आफताब आलम, सखावत हुसैन, सुलेमान मलिक, फिरोज खान, आकाश, रितिक कांत, काजल, परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) से महेश, चंदन, अनुराग, अनिशेख, भाकपा माले जिला सचिव डॉ कैलाश पांडेय, अनीता अन्ना, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से अध्यक्ष बिन्दू गुप्ता, रजनी जोशी, आइसा जिला अध्यक्ष धीरज कुमार, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन से मुकेश भंडारी, रियासत सहित नादिर सैफी, अनवर अंसारी, जीतराम, पारस, अजय, शुभम आदि दर्जनों लोग शामिल थे।

