
मंज़िल उन्हीं को मिलती है,
जिनके हौसलों में उड़ान होती है,
पंखों से कुछ नहीं होता,
उड़ान तो हौसलों में होती है।

रास्ते चाहे मुश्किल हों,
कदमों में चाहे मजबूरी हो,
दिल में अगर विश्वास रहे,
तो हर दूरी भी अधूरी हो।
हम शरीर से थोड़े अलग सही,
पर सपने हमारे कम नहीं,
दुनिया चाहे राह रोक दे,
हमारे हौसले किसी से कम नहीं।
कभी हालात ने हमें परखा,
कभी वक्त ने हमें रुलाया,
पर हर बार गिरकर हमने,
खुद को और मजबूत बनाया।
हम दया के मोहताज नहीं,
हमें अवसर की दरकार है,
हमारे भीतर भी हुनर है,
बस पहचान की दरकार है।
व्हीलचेयर हमारी कमजोरी नहीं,
यह हमारे सफर की साथी है,
हमारी पहचान हमारी मेहनत है,
हमारी ताकत हमारी आत्मशक्ति है।
जो हमें कमजोर समझते हैं,
उन्हें एक दिन समझ आएगा,
दिव्यांग शरीर हो सकता है,
पर हौसला दिव्यांग नहीं होता है।
चलना अगर पैरों से संभव नहीं,
तो सपनों से रास्ते बनाएँगे,
जहाँ दुनिया रुक जाती है,
वहीं से हम आगे जाएँगे।
हम अपने लिए ही नहीं,
हर दिव्यांग की आवाज़ बनेंगे,
अंधेरों में उम्मीद बनकर,
नई सुबह का आगाज़ बनेंगे।
याद रखना ऐ मेरे साथी,
हालात से कभी मत हारना,
मंज़िल दूर भले ही हो,
हौसलों को कभी मत मारना।
मंज़िल उन्हीं को मिलती है,
जिनके हौसलों में उड़ान होती है,
पंखों से कुछ नहीं होता,
असली ताकत हौसलों में होती है।
स्वरचित कविता
सौरभ तिवारी
ग्राम डोबा, जिला अल्मोड़ा
📱 9456183501


