
काशीपुर। उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर कूटरचित स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले संगठित गिरोह का पुलिस और राजस्व प्रशासन ने भंडाफोड़ किया है। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। आरोपियों के कब्जे से फर्जीवाड़े में इस्तेमाल किए गए छह मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।

राजस्व उपनिरीक्षक अजमल खान की ओर से कोतवाली बाजपुर में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, मेडिकल छात्रों के दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि बाजपुर तहसील क्षेत्र के पते का इस्तेमाल कर कई अभ्यर्थियों ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखंड का स्थायी निवास और अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाणपत्र हासिल किए थे।
जांच में सामने आया कि पीलीभीत जिले की नगर पंचायत बरखेड़ा कलां के चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल ने अपने पुत्र अनुराग का मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में दाखिला कराने के लिए कथित तौर पर बिचौलियों को 50 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद बाजपुर के पते पर फर्जी ओबीसी और स्थायी निवास प्रमाणपत्र तैयार कराए गए। जांच में अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी इसी तरह फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गिरोह के सदस्य बाहरी जिलों के लोगों को बाजपुर में फर्जी तरीके से किरायेदार दर्शाते थे। आरोपी रोहित और अर्चना भारद्वाज फर्जी किरायेदार तस्दीक कराने और दस्तावेज जुटाने में मदद करते थे, जबकि शिवम माथुर और मो. आलम के माध्यम से प्रमाणपत्र तैयार कराए जाते थे।
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आए सभी फर्जी प्रमाणपत्रों को निरस्त कर दिया गया है। एसएसआई जसविंदर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मो. आलम निवासी सुल्तानपुर पट्टी, बाजपुर, श्याम बिहारी भोजवाल निवासी बीसलपुर, पीलीभीत, शिवम माथुर निवासी इज्जतनगर, बरेली, रोहित निवासी हरलालपुर, बाजपुर और अर्चना भारद्वाज निवासी मुड़ियाकला, बाजपुर शामिल हैं। सभी को गुरुवार को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। मामले में पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

