
लोहाघाट के दावेदार कह रहे वही ला रहे विधानसभा का टिकट

ललित मोहन गहतोड़ी
चंपावत। विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लोहाघाट विधानसभा सीट में इस बार दावेदारों के बीच टिकट को लेकर होड़ मच गई है। जिस दावेदार से बात करो वह टिकट लाने से लेकर जीतकर दिखाने तक के दावे कर रहा है। विधानसभा चुनावों को अभी समय है लेकिन लोहाघाट 54 विधानसभा की राजनीति अभी से उफान मार रही है। कोई विकास कार्य की बदौलत तो कोई जन सेवा को सामने रखकर टिकट पाने की बात दोहरा रहा है। इस सबके इतर आम जन चुनावी माहौल से दूर दावेदारों की नब्ज टटोलने में लगा है।
जिले में लोहाघाट विधानसभा 2027 के टिकट दावेदारों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। अभी महज विधानसभा की सुगबुगाहट शुरू हुई है लेकिन प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस में दावेदारी को लेकर काफी हो हल्ला सुनाई दे रहा है। यहां भाजपा में पूर्व विधायक सहित और लगभग आधा दर्जन नाम दावेदारों की लाइन में हैं तो कांग्रेस में वर्तमान विधायक सहित तीन प्रमुख नाम सत्ता के गलियारे में गूंज रहे हैं। अभी तक एकमात्र उत्तराखण्ड क्रांति दल की ओर से विधानसभा प्रत्याशी घोषित किया गया है।

लोहाघाट सीट पर अब तक मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होता आया है। यहां भाजपा से दो बार विधानसभा पहुंचे पूरन सिंह फर्तयाल सहित वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सतीश चंद्र पाण्डेय, दर्जा राज्य मंत्री शुभाष बगौली, राज्य आंदोलनकारी हरगोविन्द बोहरा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी सहित एक और दावेदार यहां ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस के वर्तमान विधायक खुशाल सिंह अधिकारी सहित राज्य आंदोलनकारी नवीन मुरारी, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री मुन्ना ढेक सहित वर्तमान जिलाध्यक्ष चिराग फर्तयाल यहां दावेदारों की लिस्ट में पहले नंबर पर हैं। चुनाव विश्लेषकों का कहना है उपरोक्त में से यदि किसी दावेदार को पार्टी से टिकट नहीं मिलता तो उसके निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में उतरने के संकेत हैं। इसके चलते यहां भाजपा कांग्रेस और निर्दलीय के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के आसार नजर आ रहे हैं।
दोनों दलों के लिए है प्रतिष्ठा की सीट
चंपावत। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं वर्ष 2012 से लोहाघाट सीट पर मुकाबला जबर्दस्त रहा है। वर्ष 2012 और 2017 में भाजपा से पूरन सिंह फर्तयाल दो बार यहां विधायक रहे। इसके बाद वर्ष 2022 के संपन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी ने पूरन की हैट्रिक को रोकते हुए भाजपा से यह सीट झटककर वापस कांग्रेस की झोली में डाल दी। इसके चलते दोनों दलों के लिए यह एक प्रतिष्ठा की सीट बन गई है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में यहां एक लाख से ज्यादा मतदाता थे जिसमें 58.96 फीसदी मतदान हुआ था। यहां युवा, महिला, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और क्षेत्र से जुड़े मुद्दे हमेशा चुनावी भविष्य तय करते हैं।


