भीमताल। पर्यटन नगरी भीमताल-नौकुचियाताल को जोड़ने वाली 6 किमी सड़क बदहाली की मिसाल बन गई है। हर बरसात में यही सड़क जगह-जगह तालाब बन जाती है और सड़क का डामर उखड़ता जाता है राहगीरों का पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।
बड़े लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार इस सड़क के कायाकल्प के लिए 245.73 लाख रुपये की धनराशि शासनादेश से स्वीकृत हुई है।
सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी ने कहा कि लोक निर्माण विभाग इस धन का बिल्कुल भी दुरुपयोग न करे और स्थाई समाधान के साथ काम करे। उन्होंने मांग की कि डामरीकरण से पहले सड़क की मूलभूत समस्याओं को ठीक किया जाए।
पूरन बृजवासी की 4 प्रमुख मांगें:
- पहले ड्रेनेज, फिर डामर: पूरी 6 किमी सड़क की नालियों को खोलकर पक्का किया जाए। जब तक पानी निकासी का स्थाई इंतजाम नहीं होगा, डामर हर साल उखड़ता ही रहेगा।
- सुरक्षित फुटपाथ: पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सड़क के दोनों ओर इंटरलॉक टाइल्स से पक्के फुटपाथ बनाए जाएं। अभी कीचड़ और गड्ढों से पैदल चलना जोखिम भरा है।
- मलबे का स्थाई उपचार: सड़क पर जहां-जहां पहाड़ी से मलबा आता है, वहां स्थाई उपचार एवं समाधान किया जाए।
- उच्च गुणवत्ता युक्त निर्माण: जल्दबाजी में खानापूर्ति न हो। 245.73 लाख की धनराशि का एक-एक रुपया पारदर्शिता से खर्च हो और सड़क कम से कम 10 साल तक टिके।
पूरन बृजवासी ने कहा कि “पीडब्ल्यूडी पहले सड़क की बीमारी ठीक करे, फिर डामरीकरण करे।” अन्यथा यह धनराशि भी पूर्व की तरह पानी की तरह पानी में बह जाएगी।
भीमताल-नौकुचियाताल पर्यटन प्रदेश की पहचान हैं। इस सड़क की दुर्दशा से पर्यटन पर सीधा असर पड़ रहा है। इसलिए शासन-प्रशासन से मांग है कि इस कार्य को प्राथमिकता से लेकर उच्च गुणवत्ता युक्त तरीके से शीघ्र समय से पूरा किया जाए l

