
हल्द्वानी। शहर में रामलीलाओं की धूम जारी है। इसी क्रम में शहर की सबसे पुरानी रामलीलाओं में शामिल सुभाष नगर की रामलीला में दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा है। नव दुर्गा रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला के छठे दिन सूर्पनखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और सीता हरण सहित कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों के शानदार अभिनय और संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रामलीला के दौरान सूर्पनखा द्वारा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण से विवाह करने की इच्छा जताने वाले प्रसंग को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम के इनकार करने पर सूर्पनखा ने ‘ओ राम दिल को न तोड़ो’ गीत के माध्यम से उन्हें मनाने का प्रयास किया। वहीं, लक्ष्मण को रिझाने के लिए लंका का राज छोड़ने का वादा करते हुए ‘मैं तो छोड़ आई लंका का राज’ गीत पर शानदार नृत्य और अभिनय प्रस्तुत किया गया।
राम और लक्ष्मण दोनों के द्वारा ठुकराए जाने के बाद सूर्पनखा के राक्षसी रूप धारण करने के दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके बाद खर-दूषण वध और सीता हरण के प्रसंगों का मंचन किया गया। रामलीला के इन दृश्यों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे और कलाकारों के अभिनय की तालियों से सराहना की।
राम की भूमिका कार्तिक गुणवंत, लक्ष्मण की भूमिका मयंक नेगी (मोनू), सीता की भूमिका भावेश मेलकानी, रावण की भूमिका अनिल कन्नौजिया और सूर्पनखा की भूमिका कमलेश दुर्गापाल ने निभाई। कमलेश दुर्गापाल इससे पहले कैकेयी के किरदार में भी अपने अभिनय से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोर चुके हैं। सूर्पनखा के रूप में उनके अभिनय ने एक बार फिर दर्शकों में खासा उत्साह भर दिया।
रामलीला के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और समृद्ध बनाने के प्रयासों की दर्शकों ने तालियां बजाकर सराहना की। धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक मंचन का यह संगम सुभाष नगर की रामलीला को खास बना रहा है।


