
भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में आये केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवानों का दल
डा साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में दिव्य गंगा आरती, सत्संग, योग, ध्यान और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों में किया सहभाग
कार्तिक मास की अनंत शुभकामनायें
शौर्य दिवस पर माँ भारती के वीर सपूतों को नमन
सैनिकों के प्रति कृतज्ञता जीवनभर निभाया जाने वाला राष्ट्रीय धर्म
ऋषिकेश, 27 अक्टूबर 2026। भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस के अवसर पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवानों एवं चार संकाय सदस्यों का दल परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश आये। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत संचालित मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में सीसीवायडब्ल्यूआई पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे इस दल में देश के छह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कार्मिक सम्मिलित हैं। इस यात्रा का उद्देश्य प्रतिभागियों को योग की समृद्ध परंपरा, शिक्षण पद्धतियों एवं संस्थागत गतिविधियों से परिचित कराना है।
भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस राष्ट्र के प्रति समर्पण, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और वीरता के मूल्यों को स्मरण करने के अवसर हैं। ऐसे अवसर पर राष्ट्र की सुरक्षा एवं सेवा के लिए समर्पित कार्मिकों का योग और आध्यात्मिकता की पावन भूमि ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन से जुड़ना विशेष महत्त्व रखता है। योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन, एकाग्रता और आत्मानुशासन को विकसित करने का माध्यम है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण योग को जीवनशैली के रूप में समझने तथा उसके व्यापक महत्त्व से परिचित होने का अवसर प्रदान करते हैं।
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने शौर्य दिवस पर भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अदम्य साहस, अतुलनीय पराक्रम एवं राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को नमन करते हुए कहा कि हमारे सैनिक हैं, तभी हमारी सीमाएँ सुरक्षित हैं, हमारा राष्ट्र निर्भय है और हमारे नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे जवान केवल वेतन के लिए नहीं, वतन के लिए जीते हैं। उनके हृदय की प्रत्येक धड़कन भारत माँ के नाम है और उनका प्रत्येक संकल्प राष्ट्र की सुरक्षा एवं सम्मान के लिए समर्पित है। राष्ट्र की रक्षा उनके लिए केवल कर्तव्य नहीं, मातृभूमि के प्रति सर्वाेच्च निष्ठा और साधना है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि सैनिकों का शौर्य, अनुशासन और बलिदान हमें संदेश देता है कि राष्ट्र सर्वाेपरि है, राष्ट्र का सम्मान सर्वाेपरि है और राष्ट्र की सुरक्षा हम सभी का सामूहिक दायित्व है। आइए, वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और सशक्त, सुरक्षित एवं समरस भारत के निर्माण का संकल्प लें।
डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने वीर जवानों के अदम्य साहस, अटूट संकल्प एवं निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा को नमन करते हुए कहा कि हमारे सैनिक केवल सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के विश्वास, साहस और स्वाभिमान के जीवंत प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि देश के वीर जवान अपने परिवारों से दूर, कठिन परिस्थितियों में मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे रहते हैं, पूरा राष्ट्र उनके त्याग और समर्पण के प्रति नतमस्तक है। वीरों का सम्मान, राष्ट्र का सम्मान है। सैनिकों के प्रति कृतज्ञता जीवनभर निभाया जाने वाला राष्ट्रीय धर्म है।
इस दल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल तथा असम राइफल्स के जवान शामिल हुये। इस पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. विनय भारती हैं। पाठ्यक्रम के शिक्षकों में वायु सहरावत, कर्मवीर आर्य एवं वसुधा सम्मिलित हुये। परमार्थ निकेतन से योगाचार्य सुश्री गंगा नन्दिनी जी ने इस दो दिवसीय यात्रा का नेतृत्व किया।


