
नैनीताल। नैनीताल के ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल से बीमारी फैलने के मामले में मंगलवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष जिलाधिकारी, सीएमओ तथा जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।

सुनवाई के दौरान अधिकारी संक्रमण के मूल जल स्रोतों के संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए महाधिवक्ता से स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट ने प्रशासन को अगली सुनवाई तक दूषित पानी के स्रोतों का पता लगाकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
प्रशासन की ओर से अदालत को स्थिति सामान्य होने और जल स्रोतों के सैंपल सही पाए जाने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में कई पेयजल स्रोतों की स्थिति चिंताजनक पाई गई। वीरभट्टी, बेलुआखान और सरिताताल समेत 10 स्थानों से लिए गए पेयजल सैंपल इंडियन ड्रिंकिंग वाटर लैब में मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में पानी में हानिकारक बैक्टीरिया पाए जाने की बात सामने आई।
वहीं, खुर्पाताल क्षेत्र के ग्रामीणों ने सरिताताल के पास सीवर लाइन चोक होने के कारण पेयजल स्रोतों में गंदगी पहुंचने और बीमारी फैलने की आशंका को लेकर प्रार्थना पत्र दाखिल किया। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया।
कोर्ट ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य के प्रति कथित लापरवाही और करीब एक माह पहले बदबूदार पानी की शिकायत मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने पर अधिकारियों को फटकार लगाई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि टैंकरों से आपूर्ति किए जा रहे पानी में अत्यधिक मात्रा में क्लोरीन मिलाया जा रहा है, जिससे प्रभावित लोगों को परेशानी हो रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की निगरानी करने और व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों से तत्काल नए पेयजल सैंपल लेने और पूरे नैनीताल क्षेत्र में पेयजल की जांच कराने के आदेश दिए।
स्वास्थ्य विभाग की सीएमओ को भी प्रभावित परिवारों की स्थिति को लेकर अलग से शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक बीमारी फैलने के मुख्य कारणों को लेकर सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं दिया गया तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए जा सकते हैं।


