मनान के खौस्यारी में पैदल पुल की जर्जर स्थिति,आवाजाही ठप्प ग्रामीणों ने लगाई मदद की गुहार

मनान के खौस्यारी में पैदल पुल की जर्जर स्थिति,आवाजाही ठप्प ग्रामीणों ने लगाई मदद की गुहार
विभाग ने चेतावनी बोर्ड लगाकर पल्ला झाड़ा
मनान(अल्मोड़ा)। यहां खौस्यारी में कोसी नदी पर बने पैदल पुल की स्थिति बहुत ही खराब है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को गंभीर खतरा है। टूटे हुए स्लैब डेक के गिरने की संभावना है, जिससे जान-माल की हानि हो सकती है। इस पुल की कभी भी मरम्मत नहीं की गई है, और पिछले साल बजट अनुमोदन के बावजूद, प्रस्ताव डीएम कार्यालय द्वारा खारिज कर दिया गया था।
ग्रामीणों ने बताया कि इस पुल का उपयोग 10 से अधिक गांवों के लोग करते हैं, जिसमें खैराकोट, असधार, कलेत, चिपलागैर, भाटनयालजूला, नौगर, नौतनी, पोखरी, मेगरी, दुन्नी, पनोला शामिल हैं। यह पुल आवश्यक सेवाओं, चिकित्सा आपातकालीन सेवाओं, और स्कूलों तक पहुंच प्रदान करता है।
ग्रामीणों ने जिला मजिस्ट्रेट, अल्मोड़ा से तत्काल पुल और पैरापेट दीवार की मरम्मत का अनुरोध किया है, ताकि किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके और समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पुल की जर्जर स्थिति से ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं,इन गांवों के ग्रामीणों को सड़क,बाजार,स्कूल,चिकित्सा और जरूरी रोजमर्रा की सुविधाओं से जोड़ने का यही एक मात्र संपर्क है। इधर ग्रामीणों की लगातार मांग के बाद पुल के लिए जिम्मेदार लोक निर्माण विभाग ने एक चेतावनी बोर्ड लगाकर पल्ला झाड़ लिया है जिससे ग्रामीणों का आक्रोश और भड़क गया है बताते चलें कि कृषि बाहुल्य इन गांवों के पशुओं और खेती कार्य के लिए भी निर्भरता है।
इस पैदल पुल के लाभान्वित ग्रामों के ग्राम प्रधान कपिल कुमार पाण्डे (मझेड़ा -माफी)
श्रीमती मीनाक्षी नयाल (भाटनयालज्यूला)
सूरज सिंह अल्मिया (भाटगाड़)
श्रीमती रुपा आर्या (पोखरी)
सोनू नयाल (मैगड़ी)
देवेन्द्र सिंहभण्डारी(कलेत-ककराड़)
शिवराज सिंह नयाल (तिलौरा) मनोज कुमार आर्या (पडोलिया) सरकार की इस व्यवस्था से आहत होकर कहते हैं कि इन सभी गांवों से जुड़े तोक नौलागेर,नौटाणी,असधार,पथरिया,खैराकोट,डुबरागेर ।साथ ही सरस्वती शिशु मंदिर मनान जीआईसी मनान अल्मोड़ा के विद्यार्थियों,बैंक सम्बन्धित कार्य,बाजार से सामान खरीदने वाले आम जनता।जानवर एवं आवारा जानवर, घोड़े आदि सभी का आवागमन का एकमात्र विकल्प है यह पुल। विभाग ने बजट नहीं है कह कर दो बोर्ड लगवा दिया है कि पुल का उपयोग नहीं करें। ग्रामीण पूछते हैं कि वैकल्पिक व्यवस्था मार्ग कहां है?



