बिग ब्रेकिंग.. राष्ट्रपति का बड़ा बयान: जजों की नियुक्ति भी IAS की तरह परीक्षा के माध्यम से हो


बिग ब्रेकिंग.. राष्ट्रपति का बड़ा बयान: जजों की नियुक्ति भी IAS की तरह परीक्षा के माध्यम से हो
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और योग्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होनी चाहिए, जैसे कि आईएएस और अन्य सिविल सेवा अधिकारियों का चयन होता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और इसे और अधिक जवाबदेह और निष्पक्ष बनाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि न्यायाधीशों की नियुक्ति संवैधानिक निकाय के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के माध्यम से हो, तो इससे न्यायपालिका में अधिक योग्य और प्रतिभाशाली लोग आ सकेंगे।
अन्य देशों की प्रक्रिया से सीखने की जरूरत
राष्ट्रपति ने जोर दिया कि अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह है। भारत में भी इस दिशा में सुधार करने की जरूरत है ताकि आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हो।
न्यायपालिका की निष्पक्षता होगी मजबूत
राष्ट्रपति ने कहा कि जब देश के प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस, आईपीएस) एक कठिन परीक्षा और कठोर चयन प्रक्रिया से गुजरते हैं, तो न्यायपालिका के शीर्ष पदों पर नियुक्ति के लिए भी उसी स्तर की पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। इससे न्यायालयों में निष्पक्षता, योग्यता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा और न्यायिक फैसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
संविधान और न्यायिक प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत
राष्ट्रपति का यह बयान न्यायपालिका में सुधार और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यदि इस सुझाव को लागू किया जाता है, तो यह भारतीय न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा, जिससे आम नागरिकों को त्वरित और निष्पक्ष न्याय मिलने में मदद मिलेगी।
जनता और विधि विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया का इंतजार
राष्ट्रपति के इस बयान के बाद देश में विधि विशेषज्ञों, न्यायविदों और आम जनता की प्रतिक्रियाओं का इंतजार है। क्या सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाएगी? क्या न्यायपालिका में सुधार की यह पहल हकीकत बनेगी? यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।




