
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के तत्कालीन कुलपति डॉ तेज प्रताप आमा को बैच अलंकृत करते हुए।

दया जोशी
हल्द्वानी। 30 अक्टूबर 1935 को अल्मोड़ा जिला के शीतलाखेत के निकट बड़गल रौतेला गांव में सैन्य पृष्ठभूमि के परिवार में सूबेदार गंगा सिंह रौतेला एवं शारदा देवी के प्रथम संतान के रूप में जन्मी कन्या का नाम हंसा रखा गया, की प्राथमिक शिक्षा गांव की प्राथमिक पाठशाला में हुई तथा आगे की शिक्षा के लिए चाचा ब्रिगेडियर गोविंद सिंह के साथ (जो कि तब कर्नल रैंक में थे) रह रही थी। देश विभाजन के समय उनके चाचा लाहौर में तैनात थे। तब आमा की उम्र मात्र 12 वर्ष थी। वह बताती हैं 14 अगस्त 1947 की आधी रात से जो खून खराबा, आगजनी, महिलाओं, युवतियों व बच्चों पर जो अत्याचार हुए वह उन्होंने स्वयं अपनी आंखों से देखे। छोटी सी उम्र में ऐसे दृश्य देखकर दिल दहल रहा था जिंदा रहने की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही थी…. लग रहा था किसी भी पल दंगाई हमारी हत्या कर देंगे।…. ईश्वर का लाख-लाख शुक्र कि एक सैन्य विमान से लाहौर से आगरा तक आने की व्यवस्था हो गई। जिसमें हमारे परिवार के अतिरिक्त पहाड़ी मूल के अन्य लोगों को भी जान बचाने का मौका मिला। आगरा से सड़क मार्ग द्वारा दिल्ली पहुंचने पर जान तो बच गई लेकिन दहशत कई महीनो तक नहीं गई। आज भी जब वह पल याद आते हैं तो एक डरावनी कपकपी छूट जाती है।
आठवीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1952 में 17 वर्ष की आयु में जमीदार परिवार के ठाकुर सिंह मेहरा के साथ विवाह हुआ। जो मेहरा गांव भीमताल के मूल निवासी थे तथा जिनका कृषि कार्य गौलापार क्षेत्र में होता था। उनकी पांच संतानों में दो पुत्रियों तथा तीन पुत्रों में से दो पुत्रियों तथा एक पुत्र का देहांत हो चुका है। वर्तमान में उनके ज्येष्ठ पुत्र नरेंद्र सिंह मेहरा एवं यशवंत सिंह मेहरा उनके साथ सपरिवार पुश्तैनी मकान में रहते हैं। नरेन्द्र जो कि अपनी प्राकृतिक खेती तथा नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। उनकी कृषि उपलब्धियां को देखते हुए जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के तत्कालीन कुलपति डॉ तेज प्रताप ने श्री मेहरा को अखिल भारतीय किसान मेला तथा विज्ञान प्रदर्शनी समारोह में मुख्य अतिथि बनाकर उन्हें तथा उनकी माता जी हंसा मेहरा को सम्मानित किया था।
कभी जन्मदिन में केक संस्कृति की घोर विरोधी आमा ने आज अपने 91 जन्म दिवस पर पोते पोतियो से केक काटकर अपना जन्मदिन मनाने की मनसा जाहिर की।


